बैतूल की ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी ने न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जज की कुर्सी संभालने के बजाय आध्यात्मिक जीवन अपनाने का निर्णय लिया है। उनके साथ चार अन्य बहनें भी जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी। पांचों दीक्षार्थियों के सम्मान में बैतूल सकल जैन समाज की ओर से भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
प्रखरश्री दीदी के अनुसार, उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बनें। उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण कर उनका सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य की भावना थी। उनका मानना है कि भगवान महावीर के बताए संयम और सेवा के मार्ग पर चलकर वह समाज के लिए अधिक योगदान दे सकती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागने का फैसला किया।
पांचों दीक्षार्थी बहनों की बिनौली में विंटेज कारें, शाही बग्घियां और उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र रहे। शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पमालाओं और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। समारोह जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां पारंपरिक गोदभराई की रस्म निभाई गई। प्रखरश्री दीदी सहित पांचों बहनें 22 नवंबर को विधिवत जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी।
