शिक्षक संगठनों का राजनीतिक दबदबा खत्म, एमएलसी चुनाव में नहीं खुला खाता; 48 साल पुराना वर्चस्व टूटा
उत्तर प्रदेश में शिक्षक संगठनों की राजनीति को बड़ा झटका लगा है। कभी विधान परिषद में मजबूत पकड़ रखने वाले शिक्षक संगठन अब एमएलसी चुनाव में अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। प्रदेश की 11 एमएलसी सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों के बड़े-बड़े गुटों को करारी हार का सामना करना पड़ा। माध्यमिक शिक्षक संघ के चंदेल, पांडेय और एकजुट गुट समेत कई संगठनों के उम्मीदवार चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके। ज्यादातर सीटों पर संगठन के प्रत्याशी दूसरे स्थान की लड़ाई में भी नहीं पहुंच पाए।
सबसे बड़ा झटका माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट को लगा है, जिसका करीब पांच दशक तक विधान परिषद में दबदबा रहा। ओमप्रकाश शर्मा के नेतृत्व में लगभग 48 साल तक संगठन का प्रतिनिधित्व सदन में बना रहा, लेकिन इस बार संगठन एक भी सीट नहीं जीत सका। चुनाव से पहले ध्रुव कुमार त्रिपाठी और प्रमोद मिश्रा भाजपा में शामिल हो गए। वहीं संगठन के अन्य उम्मीदवारों को भी बेहद कम वोट मिले। इससे शिक्षक संगठनों की राजनीतिक ताकत कमजोर होने का संकेत मिला है।
चुनाव के बाद विधान परिषद में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में अब केवल माध्यमिक शिक्षक संघ के चंदेल गुट के संरक्षक राजबहादुर चंदेल ही बचे हैं। वह 1992, 1998 और 2004 में एमएलसी चुने गए थे और बाद में निर्दलीय समूह बनाकर भी जीत हासिल की। शिक्षक संगठनों के नेताओं का मानना है कि राजनीतिक दलों की बढ़ती दखलअंदाजी ने उनकी पकड़ कमजोर की है। ऐसे में आने वाले समय में सदन में शिक्षकों के मुद्दों और अधिकारों की आवाज उठाना संगठनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
