रिश्वत पर विवादित बयान देना कार्यपालन यंत्री को पड़ा भारी, सीबी अहिरवार निलंबित
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में रिश्वतखोरी को लेकर दिए गए बयान के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार पर शासन ने कार्रवाई की है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दरअसल, लोकायुक्त की टीम ने विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद जब कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से मीडिया ने सवाल किए तो उन्होंने कहा था कि रिश्वत मांगना गलत है, लेकिन कोई व्यक्ति अपनी खुशी या प्यार से कुछ देता है तो वे उसे रख लेते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद शासन ने इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए निलंबन आदेश जारी किया।
यह पूरा मामला मझगांय मध्यम परियोजना की नहर में कैनाल स्लूस निर्माण कार्य के भुगतान से जुड़ा है। ग्वालियर के पंजीकृत ठेकेदार गौरव तोमर के तीन बिल पहले ही पास हो चुके थे, जबकि चौथे और अंतिम बिल को स्वीकृति देने के बदले विभागीय कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा। ठेकेदार की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस सागर ने कार्रवाई करते हुए संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक को गिरफ्तार किया। टीम ने दीपक सिंह परमार के पास से 15 हजार और अरविंद कुमार पाठक के पास से 30 हजार रुपये बरामद किए।
हालांकि, लोकायुक्त ने कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार को सीधे रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार नहीं किया था, लेकिन उनके सार्वजनिक बयान को शासन ने गंभीर अनुशासनहीनता माना। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भोपाल स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है। इस मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है।
