शूर्पणखा प्रसंग और खर-दूषण वध का प्रभावशाली मंचन
रुद्रपुर। नगर की प्रमुख, प्राचीन बस स्टैंड वाली रामलीला में विगत रात्रि शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण की उच्छृंखलता, खर-दूषण वध, शूर्पणखा का रावण दरबार में पहुंचना, रावण द्वारा सीता हरण का निर्णय लेना तथा रावण-मारीच संवाद तक की लीला का प्रभावशाली मंचन हुआ। कलाकारों की भावपूर्ण संवाद अदायगी और सजीव अभिनय ने इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। हास्य, क्रोध, प्रतिशोध और वीरता के विविध भावों से सजी लीला ने दर्शकों को बांधे रखा।
विगत रात्रि की रामलीला का उद्घाटन मुख्य अतिथि ढींगड़ा कम्प्युटर, वीवो डिस्ट्रीब्यूटर्स श्री प्रीत कुमार ढींगड़ा, केशव ढींगड़ा, नीलम ढींगडा, नितिका ढींगडा, निश्चल ढींगड़ा, रसिका एवं मोहक ने सपरिवार दीप प्रज्जवलित कर किया। रामलीला कमेटी ने सभी अतिथिगणो को माल्यार्पण कर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मनित किया।
लीला में खर-दूषण की उच्छृंखल गतिविधियों और शूर्पणखा के पंचवटी पहुंचने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। श्रीराम और लक्ष्मण के साथ शूर्पणखा के संवादों ने प्रसंग को रोचक बनाया। इसके बाद सीता के प्रति उसके आक्रामक व्यवहार और लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटे जाने के दृश्य का मंचन हुआ। अपमान से आहत शूर्पणखा का क्रोध और प्रतिशोध की भावना के घटनाक्रम ने आगे होने वाले संघर्ष की भूमिका तैयार की।
इसके पश्चात शूर्पणखा के उकसाने पर खर-दूषण का श्रीराम के विरुद्ध युद्ध के लिए निकलना और अंततः श्रीराम के हाथों उनका वध होने का दृश्य मंचित हुआ। युद्ध प्रसंग में कलाकारों ने उत्साह और ऊर्जा के साथ अभिनय किया। श्रीराम की वीरता तथा अधर्म के अंत का संदेश इस दृश्य के माध्यम से सामने आया। खर-दूषण वध के बाद शूर्पणखा का लंका पहुंचना लीला को अगले महत्वपूर्ण मोड़ पर ले गया।
रावण दरबार में शूर्पणखा ने अपने अपमान और खर-दूषण के वध का वृत्तांत सुनाया। उसके शब्दों से क्रोधित रावण ने प्रतिशोध लेने के लिए सीता हरण का निर्णय किया। दरबार के संवादों में रावण का अहंकार और शूर्पणखा की प्रतिशोध की भावना प्रभावी रूप से उभरकर सामने आई। इसके बाद रावण-मारीच संवाद में मारीच ने श्रीराम के पराक्रम का वर्णन करते हुए रावण को उसके निर्णय के परिणामों से सावधान किया।
मारीच की चेतावनी के बावजूद रावण का अपने निश्चय पर अड़े रहना इस प्रसंग का मुख्य भाव रहा। कलाकारों ने संवादों के माध्यम से विवेक और अहंकार के द्वंद्व को प्रस्तुत किया। इसी घटनाक्रम के साथ विगत रात्रि की लीला संपन्न हुई।
आज सूर्पनखा की भूमिका में सचिन मुंजाल, रावण की भूमिका में विशाल भुड्डी, गणेश भगवान की भूमिका में आशीष ग्रोवर, राम की भूमिका में मनोज अरोरा, सीता की भूमिका में दीपक अग्रवाल, लक्ष्मण की भूमिका में राजकुमार कक्कड, खर- मनोज मुंजाल, दूषण- गर्वित मुंजाल, मारीच की भूमिका में मोहन लाल गुड्डी, विभीषण सचिन आनन्द, मेघनाद- वैभव भुड्डी, प्रहस्त-मनोज मुंजाल ने शानदार अभिनय कर उपस्थित जनसमूह का दिल जीत लिया। संचालन मंच सचिव विजय जग्गा व संदीप धीर ने किया।
इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री सुशील गाबा, विजय अरोरा, कोषाध्यक्ष अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, नरेश शर्मा, बीना बेहड़, मिनाक्षी गाबा, अमित अरोरा बोबी, जगदीश टंडन, अशोक गुम्बर, महावीर आजाद, राकेश सुखीजा, हरीश अरोरा, सुभाष खंडेलवाल, दिनेष खंडेलवाल, गौरव तनेजा, सुरेश बब्बर, प्रेम खुराना, संजीव आनन्द, आशीष ग्रोवर आशू, हरीश सुखीजा, गौरव राज बेहड़, सौरभ राज बेहड़, विजय विरमानी, तेजस गाबा, मोहक गाबा, अमित चावला, कर्मचन्द राजदेव, शीतल गाबा, अन्नू अरोरा, अन्नू भुड्डी, अमन गुम्बर, सन्नी आहूजा मोहित सुखीजा, भानु चुघ, रवि , दीपक षर्मा, दीपा गंभीर, कपिश सुखीजा, बिट्टू ग्रोवर, रवि अरोरा, रोहित जग्गा, सचिन तनेजा, वैभव ग्रोवर, माधव आन्नद, पुलकित बांबा, सुमित आनन्द, वैभव भुडी, बल्लू घीक, अभिषेक खेड़ा, विजय चिलाना, आशू गभीर, पारस अरोरा, समप्रीत ग्रोवर आदि उपस्थित थे।
बाक्स 001- शूर्पणखा के किरदार में सचिन गुंजाल का सौम्य, सभ्य और उर्जा से परिपूर्ण अभिनय
शूर्पणखा के किरदार में सचिन गुंजाल ने सौम्य, सभ्य और ऊर्जा से परिपूर्ण अभिनय प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ी। उनकी प्रभावशाली संवाद अदायगी, पुराने क्लासिकल गानो पर भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं और मंच पर सहज प्रस्तुति ने किरदार को जीवंत बना दिया। राम लखन को मोहित करने के यत्न मे स्त्री सुलभ चंचलता और नाटकीय भावों को उन्होंने सुंदर संतुलन के साथ निभाया। सचिन का अभिनय दर्शकों को आकर्षित करने के साथ रामलीला के इस प्रसंग को विशेष रूप से यादगार भी बना गया।
बॉक्स 002- रावण-मारीच संवाद में पिता-पुत्र ने बिखेरा अभिनय का जादू
रुद्रपुर की मुख्य रामलीला में पिता-पुत्र की जोड़ी ने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। पिता मोहनलाल भुड्डी ने मारीच और पुत्र विशाल भुड्डी ने रावण की भूमिका में यादगार प्रस्तुति दी। रावण-मारीच संवाद में दोनों की प्रभावशाली संवाद अदायगी, भावपूर्ण मुखमुद्राओं और मंचीय तालमेल ने प्रसंग को जीवंत बनाया। दोनों कलाकारों ने अपनी अभिनय कला की सुंदर छाप छोड़ी।
बॉक्स 003- रामभक्तों से रोज खचाखच भर रहा रामलीला मैदान
रुद्रपुर। नगर की प्रमुख, प्राचीन बस स्टैंड वाली श्रीरामलीला में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। लगभग अठारह सौ से दो हजार रामभक्त एवं मातृशक्ति लीला के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। रामलीला मैदान रोज खचाखच भर रहा है। कलाकारों का जीवंत अभिनय और प्रभावशाली संवाद दर्शकों को बांधे हुए हैं। मातृशक्ति की उत्साहपूर्ण सहभागिता और रामभक्तों की श्रद्धा आयोजन की भव्यता बढ़ा रही है।
004- सेवादारों की निस्वार्थ सेवा के सभी कायल
श्री रामलीला मंचन के सभी दिनों मे श्री रामलीला कमेटी, श्रीराम नाटक क्लब और सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों, कलाकारों और सेवादारों के लिए लंगर की सेवा निरंतर चलती रहती है । सेवादार समय पर कतार संभालते, चाय-भोजन परोसते और व्यवस्था बनाए रखते हैं, ताकि हर व्यक्ति को सम्मान और सुविधा मिले। थकान के बीच भी उनकी निःस्वार्थ सेवा सबके लिए प्रेरणा बनती है।
सेवादारों मे सुशांत चौहान, संजीव कामरा, तरुण चोपड़ा, विकास चोपड़ा, मनदीप अरोरा, राजकुमार नारंग, महेश गर्ग, सूरज सचसेवा, शौर्य चोपड़ा, हितेश ठुकराल, हैँ!
