

राजीव कुमार गौड
भाजपा द्वारा कांग्रेस का बार-बार पुतला फूंका जाना औचित्यहीन…पूजा सिंह
देहरादून/काशीपुर। उत्तराखंड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चाओं में हैं। इस हत्याकांड को लेकर प्रदेश में फिर से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ प्रदेश की जनता भी अंकिता भंडारी के लिए सड़कों पर उतरी हुई है। यही कारण है कि अब इस मामले में सरकार पर दबाव बनाने के लिए कुछ संगठनों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया है। अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने खुद प्रदेश की जनता से उत्तराखंड बंद की अपील की है। उनका कहना है कि अंकिता सिर्फ उनकी बेटी नहीं थी, बल्कि पूरे भारत की बेटी थी, उसी को न्याय दिलाने के लिए 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। वीरेंद्र भंडारी ने आमजन, खासकर व्यापारी वर्ग से अपील की है कि 11 जनवरी के उत्तराखंड बंद में उनका सहयोग करें।
वीरेंद्र भंडारी ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बयान देते हुए कहा था कि सरकार किसी भी जांच से पीछे हटने वाली नहीं है। सीएम धामी ने ये भी कहा था कि वो खुद अंकिता के माता-पिता से मिलेंगे। उधर, भाजपा ने इस मामले में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, तो कांग्रेस भी पलटवार करने से नहीं चूक रही है। बुधवार को
काशीपुर में भाजपा नगर मंडल की तरफ से कांग्रेस पार्टी पर अंकिता के नाम पर राजनीति चमकाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी का पुतला दहन किया गया, तो तुरंत पलटवार करते हुए काशीपुर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती पूजा सिंह ने कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस का बार-बार पुतला फूंका जाना औचित्यहीन है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान को भी हास्यास्पद बताया, जिसमें उन्होंने कहा है कि अंकिता के माता-पिता से मैं स्वयं बात करूंगा, वह न्याय के लिए जो चाहते हैं, सरकार उनकी भावनाओं पर निर्णय लेगी। पूजा सिंह ने कहा कि किसी हत्याकांड की जांच किसी के माता-पिता के आदेश से नहीं, बल्कि कानून की प्रक्रियाओं के अनुसार होनी चाहिए। लंबे समय से अंकिता के माता-पिता न्याय की गुहार लगा रहे हैं और अब उनके द्वारा 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आहवान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में शीघ्र ही सीबीआई जांच के आदेश पारित करने चाहिएं।
